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Patna News: PMCH में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, दो डॉक्टरों से मारपीट के बाद सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | PMCH में दो जूनियर डॉक्टरों से मारपीट के विरोध में हड़ताल, इमरजेंसी समेत कई चिकित्सा सेवाएं प्रभावित, डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग की।

पटना, 20 अगस्त।पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में जूनियर डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर असर पड़ा है। बुधवार रात दो जूनियर डॉक्टरों पर हमला किए जाने के विरोध में गुरुवार को जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया। हड़ताल के कारण अस्पताल की इमरजेंसी समेत कई चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है।

जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल परिसर में मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टरों पर हमला होना गंभीर सुरक्षा का मुद्दा है। उनका आरोप है कि बुधवार रात अज्ञात लोगों ने दो जूनियर डॉक्टरों को लाठी-डंडे और रॉड से पीटा। घटना के बाद अस्पताल के चिकित्सकों में नाराजगी बढ़ गई और गुरुवार को बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर परिसर में जुट गए।

मारपीट के बाद डॉक्टरों में आक्रोश

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के अध्यक्ष सत्यम कुमार के मुताबिक, बुधवार रात अस्पताल परिसर में दो जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। हमले में कथित तौर पर लाठी-डंडे और लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया गया।

घटना की जानकारी फैलने के बाद अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया। गुरुवार को डॉक्टरों ने काम से दूरी बनाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।

इमरजेंसी सहित कई सेवाओं पर असर

जूनियर डॉक्टरों के काम बंद करने का सीधा असर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ा। PMCH बिहार के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है और यहां पटना के अलावा दूसरे जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

हड़ताल के कारण इमरजेंसी और अन्य चिकित्सा सेवाओं में कामकाज प्रभावित होने की बात कही गई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के सामने मरीजों का इलाज सामान्य बनाए रखने के साथ-साथ डॉक्टरों के विरोध को शांत कराने की चुनौती भी है।

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। उनका कहना है कि वे मरीजों के इलाज को लेकर गंभीर हैं, लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा की अनदेखी भी नहीं की जा सकती।

अस्पताल परिसर में सुरक्षा पर उठे सवाल

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा नया नहीं है। उनका दावा है कि पहले भी अस्पताल परिसर में चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जाती रही है।

जूनियर डॉक्टरों का सवाल है कि अगर इलाज करने वाले डॉक्टर ही अस्पताल के भीतर सुरक्षित नहीं हैं, तो वे बिना डर के मरीजों की सेवा कैसे कर पाएंगे। डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

जूनियर डॉक्टरों ने मारपीट की घटना में शामिल लोगों की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के साथ दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

डॉक्टरों ने मांग रखी है कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं, प्रवेश और निकास व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कार्रवाई नहीं हुई तो जारी रहेगा विरोध

जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मारपीट के मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती और उनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा नहीं दिलाया जाता, तब तक विरोध जारी रखा जाएगा।

डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों की परेशानी को समझते हैं, लेकिन सुरक्षा के सवाल को नजरअंदाज करके सामान्य तरीके से काम करना उनके लिए मुश्किल है। उनका कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर और मरीज दोनों के लिए सुरक्षित वातावरण होना जरूरी है।

अब नजर इस बात पर है कि PMCH प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। अगर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी जल्द होती है तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डॉक्टरों को ठोस भरोसा दिया जाता है, तो अस्पताल की सेवाओं को सामान्य स्थिति में लाने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।

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डॉक्टरों की सुरक्षा सिर्फ चिकित्सकों का नहीं, मरीजों का भी सवाल

अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट की कोई भी घटना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। डॉक्टरों पर हमला होने से केवल चिकित्सक ही असुरक्षित महसूस नहीं करते, बल्कि इसका असर अस्पताल की पूरी व्यवस्था पर पड़ता है। PMCH जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में जूनियर डॉक्टर चिकित्सा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

यह भी जरूरी है कि सुरक्षा की मांग और मरीजों के इलाज—दोनों के बीच संतुलन बनाया जाए। डॉक्टरों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो और अस्पताल प्रशासन ऐसी व्यवस्था तैयार करे जिससे भविष्य में किसी विवाद के हिंसक रूप लेने की स्थिति न बने।

अगर अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षा, निगरानी और शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था हो, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। डॉक्टरों को भयमुक्त माहौल में काम करने का अधिकार है, वहीं मरीजों को भी बिना बाधा इलाज मिलने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की है।

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